Thursday, 10 January 2019

बनारस के अनगिन छुपे हुए रंग







बनारस कई ज़ाहिर वजहों से एक अद्भुत शहर रहा है । कहते हैं कि ये बस घूमने नहीं बल्कि महसूस करने की नगरी है । मेरा भी इस शहर का सफ़र कई मायनों में ख़ास रहा ।बहरहाल इस सफ़र में सबसे ख़ूबसूरत और दिलचस्प अध्याय तब जुड़ा जब मुलाक़ात "भोमे निषाद" जी से हुई । 

दरअसल पिछली शाम के "बोट राइड" में एक सुरीली आवाज़ पड़ी थी कानों में जब एक नाव बगल से आगे निकली थी, मानो कोई नाविक गुनगुनाता हुआ नाव चला रहा हो । उस आवाज़ का असर कुछ यूँ हुआ कि अगले दिन निकल पड़े हम (मैं और मेरा एक दोस्त) अस्सी घाट की ओर उस सुरीली आवाज़ की तलाश में । पूछने पे ये मालूम हुआ कि वाक़ई एक शख़्स है ऐसा जो निषाद घाट के आस पास कहीं नाव चलाता है । संयोगवश इनसे मुलाक़ात भी हो पाई । मिलने पे ज़ाहिर हुआ कि जितना सोचा था उससे कई गुना ज़ियादा सुरीली थी ये आवाज़ । बस फिर क्या था - शाम का वक़्त, ठंडी मदमस्त हवाएं, बोट राइड और अद्भुत संगीत का दौर।



ख़ुद के लिखे हुए गानों को ख़ुद ही धुन भी देकर गा रहा था ये शख़्स । उन गानों के बोल में एक सार था, धुन में एक शांति और इनकी आवाज़ में एक विलक्षण आकर्षण । एक-दो गानों में ही दिल में स्थान बना लिया था इन्होंने जैसे । इनको सुनना एक अविस्मरणीय, अद्भुत और अलौकिक अनुभव रहा जो शायद कई बार बनारस गए पर्यटकों के हिस्से भी नहीं आया होगा । 

हालांकि इनसे मिलकर बस एक बात का अफसोस और गहरा ज़रूर हो गया कि भारत में कला की वाक़ई कोई क़द्र नहीं वरना ऐसी प्रतिभाएं बहुत ख्याति के हक़दार हैं, ख़ैर । मिलिए बनारस के इस छुपे हुए बेहद ख़ूबसूरत रंग से जो आपके मन पर अमिट छाप छोड़ जाएगा ।

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©Both the text and the photographs are protected works of the author Bibhuti Bhushan Mishra. They can not be published, reproduced, adapted or otherwise dealt with without the prior permission of the author.



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